A Blind Boy - 4

A Blind Boy




आरव के जाने के बाद आरुष उसकी कही बात सोचते रहता है और उसे अपनी गलती का एहसास होता है। वह सोचता है जब निशा उसे मिलेगी वह उसे अपनी गलती की माफी मांग लेगा और फिर वहां से चला जाता है।
 

इधर आरव को निशा के लिए बुरा लगता है। वह भाग के घर के बाहर जाता है और निशा को ढूंढने लगता है और सोचता है। भाई ने यह सही नहीं किया। कितना बुरा लगा होगा निशा दी को। मुझे उनसे बात करनी होगी। भाई यह क्यों नहीं समझ रहे हैं कि निशा दी उनकी कितनी केयर करती है। उन्हें उनसे अच्छी दोस्त नहीं मिल सकती और चारों तरफ देखने लगता है फिर वह सोचता है कहीं निशा दी गार्डन में तो नहीं और फिर वह गार्डन की तरफ निकल जाता है।


वह जैसे ही गार्डन में पहुंचता है उसकी नजर उसी जगह पर जाती है जहां पर निशा दी और आरुष हमेशा बैठते हैं। वहां पर निशा आराम से सर झुकाए बैठे ही होती है। वह उनके पास जाता है और बैठ जाता है। आपको पता है निशा दी। इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि अब आपको दिखाई नहीं देता। आप अभी भी उतनी ही अच्छी हो जितनी कि आप पहले थी और अगर आरुष भैया को यह समझ नहीं आ रहा तो वो आपके दोस्त कहलाने लायक नहीं है। आप उनकी वजह से अपना मन दुखी मत करो। अगर वह सच में आपके अच्छे दोस्त हैं तो आप जैसी भी हो वह आपको अपनी लाइफ में एक्सेप्ट करेंगे। तब निशा उसे बोलती है - मुझे नहीं पता आरव  आगे क्या होगा?? लेकिन इतना जरूर जानती हूं कि अब मैं यहां नहीं रह सकती और वहां से चली जाती है।


कुछ दिन बाद आरुष अपने घर के बाहर आता है और उसकी नजर लेटर बॉक्स पर जाते हैं जिसके ऊपर एक लेटर रखा हुआ होता है। वह उस लेटर को उठाता है और उसके पीछे देखता है तो उसमें निशा का नाम लिखा होता है। वह सोचता है निशा का लेटर और उसे खोलकर पढ़ने लगता है। वह जैसे ही पड़ता है उसकी आंखों में से आंसू आने लग जाते हैं और उसके हाथ से लेटर गिर जाता है। उस लेटर में लिखा हुआ होता है- 


   You will be always special for me
        ''Please take care of my eyes for me'' 
                                                       Nisha




The End

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