Rishtey - 2
Rishtey शिवम खुशी-खुशी कार चला रहा होता है। देखना जब आर्या तुम्हें देखेगी तो कितनी खुश हो जाएगी। हर वक्त बस तुम्हारी ही बातें करती रहती है। कितना मिस किया है उसने तुम्हें। हम सब में सिर्फ वही थी जिसे पूरा यकीन था कि तुम जरूर वापस आओगी। और मम्मा उनकी तो जान बसती है तुममे। जब से तुम गई हो हालत खराब कर ली है उन्होंने अपनी। हमेशा तुम्हें याद करके रोती रहती है। कितनी बार कहा मैंने उनसे की हमारे साथ आकर रहो लेकिन वह मानती ही नहीं थी। शिखा उसकी बातें इमोशनल होकर सुनती रहती है और बोलती है - कितना परेशान कर दिया ना मैंने तुम लोगों को। काश मैं उस दिन गई नहीं होती तो यह सब नहीं होता। तब शिवम उसे बोलता है ऐसा मत बोलो। उस वक्त तुम्हारी सहेली को तुम्हारी जरूरत थी और जरूरत में अगर अपने ही नहीं साथ देंगे तो और कौन देता। वैसे यह तो मैंने पूछा ही नहीं उसका भी तो एक्सीडेंट हुआ था। ठीक तो है ना वह?? तब शिखा उससे उदास होकर बताती है। नहीं शिवम उस एक्सीडेंट में मैं तो बच गई लेकिन वह नहीं बच पाई। तब शिवम उसके हाथ पर हाथ रख कर बोलता है तुम चिंता मत करो सब ठीक हो जाएगा। थोड़ी देर बाद वो दोनों घर के बाहर खड़े हो...