A Blind Boy - 1

A Blind Boy



सुबह सुबह अलार्म बजने की आवाज आती है। उसे परेशान होकर आरुषि नींद में हाथ बढ़ाकर अलार्म को बंद करता है और आलसी में उठ कर बैठ जाता है। वह हाथ इधर-उधर करके अपनी स्टिक ढूंढता है और उसके सहारे खड़े होता है। वो बाथरूम में जाकर अपना मुंह वास करता है। वही साइड में उसका चश्मा रखा होता है वह उसे उठाकर पहनकर बाहर आता है।

वह स्टिक के सहारे चलते हुए हॉल में आता है और डाइनिंग टेबल पर बैठ कर नाश्ता करने लगता है। थोड़ी देर बाद स्टिक के सहारे सीढ़ियों से नीचे उतरता है और गार्डन में जाता है। लेकिन वहां पर सारे बच्चे उसे देख कर उस पर हंसने लगते हैं और उसका आसपास सर्कल बनाकर उसके मजे लेने लगते हैं। उनमें से एक लड़का उसे धक्का दे देता है और वह नीचे गिर जाता है।

निशा दौड़ते हुए आती है और आरुष को उठाते हुए कहती है। तुम ठीक तो हो ना। तुम्हें चोट तो नहीं लग गई और उसे अपने साथ ले जाती है। इड में बेंच पर बिठाती है और उसके हाथ पर हाथ रखकर उसे समझाती है। प्लीज आरुष तुम इन सब चीजों को इतना माइंड मत करो। तुम जैसे भी हो  बहुत अच्छे हो। तुम मेरे बेस्ट फ्रेंड हो। और मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि तुम देख सकते हो या नहीं। आरुष  उससे बोलता है। नहीं मैं ऐसा नहीं रह सकता और अपनी स्टिक लेकर वहां से चला जाता है। निशा उसे रोकने की कोशिश करती है पर वह नहीं रुकता और उदास होकर अपने घर चला जाता है।

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