A Blind Boy - 2

A Blind Boy



आरुषि अपने कमरे में उदास बैठा होता है। तभी पीछे से उसकी मां खुश होकर वहां आती है। आरुष-आरुष और उसे प्यार से गले लगाती है। देखा मैंने कहा था ना सब ठीक हो जाएगा। देखो भगवान ने हमारी सुन ली। अब तुम भी बहुत जल्द देख पाओगे और उसके फोरहेड पर किस करती हैं।


थोड़ी देर बाद वह दोनों कार में बैठकर हॉस्पिटल जाते हैं। जहां पर उसके आंखों का ट्रीटमेंट होने वाला होता है। डॉक्टर उसे चेक करते हैं फिर वह उसकी मां इसे कहते हैं। देखिए हम अपनी तरफ से किसी प्रकार की लापरवाही नहीं करेंगे। आप चिंता मत कीजिए आपका बेटा कुछ ही दिनों में देख पाएगा। हमें डोनर मिल गया है। बस एक बार ऑपरेशन हो जाए फिर वह पूरी तरह से ठीक हो जाए।


अगले हफ्ते आरूष और उसकी मां घबराए हुए होते हैं क्योंकि आज आरुष की आंखों का ऑपरेशन होने वाला है। आरुषि अपनी मां से कहता है। मैं ठीक तो हो जाऊंगा ना माँ।  कहीं ऐसा ना हो हम इतनी उम्मीदें लगा कर यहां आए हैं लेकिन यहां पर भी डॉक्टर मेरी आंखों का कुछ नहीं कर पाए। इससे पहले भी तो हम कई जगह पर गए हैं लेकिन इतने सालों में कहीं भी मेरी आंखों का इलाज ठीक से नहीं हो पाया। तब उसकी मां उसे बोलती है। इस तरह उम्मीद नहीं हारते बेटा। मुझे पूरा यकीन है तुम्हारा यह ऑपरेशन पूरी तरह से सफल होगा और तुम इस दुनिया को अपनी आंखों से जरूर देख पाओगी ।इतने में वहां पर डॉक्टर आ जाते हैं और वह उसे ऑपरेशन के लिए ले जाते हैं।


4 घंटे बाद भी ऑपरेशन थिएटर की लाइट जल रही होती है और आरुषि की मां बाहर बहुत परेशान होती है। इतनी देर हो गई लेकिन अभी तक डॉक्टर बाहर नहीं आए। ठीक तो होगा ना मेरा बीटा। कहीं उसकी आंखें ठीक करवाने के चक्कर में मैं उसे ही ना दू। इतने में डॉक्टर बाहर आ जाते हैं। वह भागकर उनके पास जाती है और पूछती है डॉक्टर ठीक तो है ना मेरा बेटा। कोई दिक्कत तो ही हुई हे ना। डॉक्टर उन्हें बोलते हैं आप बिल्कुल टेंशन मत लीजिए उसका ऑपरेशन सक्सेसफुल हुआ है। लेकिन हमें कुछ दिन का इंतजार करना पड़ेगा। उसके बाद वह पूरी तरह से देख पाएगा और वहां से चले जाते हैं।


5 दिन बाद आरुषि की मां उसका हाथ पकड़ कर बैठी होती है और कहती है। आज इतने सालों का हमारा इंतजार खत्म होने वाला है। आज के बाद तुम्हें कभी अंधेरे में नहीं रहना पड़ेगा। बस अब कुछ ही देर में डॉक्टर तुम्हारी आंखों की पट्टी खोलने वाली है। उसके बाद तुम खुद इस दुनिया को अपनी नजरों से देखोगे। और उसे प्यार से गले लगा लेती है। थोड़ी देर बाद डॉक्टर वह आते है आरुष एक्सीटेंड होकर उनसे पूछता है। मेरी पट्टी कब खुलेगी डॉक्टर साहब?? वह उसे बोलते हैं। बस हम उसी की तैयारी कर रहे हैं और उसकी आंखों की पट्टी हटाते हैं। और उसे कहते हैं अब आराम से अपनी आंखें खोलो हैं और उससे पूछते हैं केसा आग रहा है अब कोई दिककत तो नहीं हो ही तब आरुष ना में इशारा करता है। वो उसे बोलते है। अब तुम आराम से अपनी आंखें खोलो। जल्दबाजी मत करना नहीं तो तुम्हें दर्द होगा। आरुष उनकी बात सुनकर खुशी से अपनी आंखें खोलता है और धीरे-धीरे चारों तरफ देखता है। और उसकी आंखों में आंसू आ जाते हैं। वह अपनी मां को गले लगा कर बोलता है मुझे सब दिखाई दे रहा है मां। मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा कि मैं भी अब देख सकता हूं।

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